बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स – धातु एवं अधातु

बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए पाठ को अच्छे से समझना बहुत ज़रूरी है | इस article में धातु एवं अधातु पाठ  से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण नोट्स डाले गए हैं | यह  नोट्स आपको बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने में जरूर साहयता करेंगे |

तत्वों को उनके गुणधर्मो के आधार पर धातु और अधातु के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
कुछ धातुओं के  उदाहरण है:
आयरन (Fe ), एल्यूमिनियम (Al ), सिल्वर (Ag ), कॉपर (Cu )
• कुछ अधातुओ के उदाहरण हैं:
हाइड्रोजन (H ), नाइट्रोजन (N ), सल्फर (S ), ऑक्सीजन (O )

 

 

धातुओ के रासायनिक गुणधर्म

(1) वायु के साथ प्रतिक्रिया:
मेटल ऑक्साइड बनाने के लिए धातु ऑक्सीजन के साथ संयोजन करते हैं।
धातु + O2 —> धातु ऑक्साइड

उदाहरण :
(i) 2Cu + O2 —> 2CuO
कॉपर ऑक्साइड (काला)

(ii) 4(Al) + 3O2 —> 2Al2O3
अल्यूमिनियम ऑक्साइड

(iii) 2Mg + O2 —>2MgO

विभिन्न धातु O2 की ओर अलग-अलग प्रतिक्रियाशील दिखाते हैं।

• Na और K वायु मई आकस्मिक आह पकड़ लेते है जिसे रोकने के लिए इन्हे केरोसिन तेल मे डुबो कर रखा जाता है।

• Mg , Al , Zn , Pb वायु के साथ धीरे अभिक्रिया करते है। इन धातुओं पर ऑक्साइड की परत चढ़ जाती है।
• Fe (आयरन) वायु मे गर्म करने पर प्रज्वलित नहीं होता लेकिन ज्वाला मे लौह चूर्ण डालने पर वे तेजी से जलने लगते है।
•  Cu भी प्रज्वलित नहीं होता लेकिन उस पर काले रंग के कूपर ऑक्साइड की परत चढ़ जाती है।
• Au (चाँदी ) और Ag (सोना) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते।

 

Also see English Version of this chapter

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उभयधर्मी ऑक्साइड: धातु आक्साइड जो दोनों एसिड के साथ-साथ बेस के साथ भी प्रतिक्रिया करते हैं और
लवण और पानी का उत्पादन करते है उन्हे अम्फोटेरिक ऑक्साइड कहा जाता है।

उदाहरण:

Al2O3 + 6HCl 2AlCl3 + H2O

Al2O3 + 2NaOH2 NaOH2 + H2O  सोडियम अल्युमिनेट

(2) जल के साथ अभिक्रिया

धातु + जल —> धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन
धातु ऑक्साइड + जल —> धातु हाइड्रॉक्साइड

उदाहरण :

(i) 2Na + 2H2O —> 2NaOH + H2+  हीट

(ii) Ca + 2H2O —> Ca(OH)2 + H2

(iii)Mg + 2H2O —>  Mg(OH)2+ H2

(iv) 2Al + 3H2O —> Al2O3+ 3H2

(v) 3Fe + 4H2O —>  Fe3O4+ 4H2

(3) धातुओं की तनु अम्ल के साथ  अभिक्रिया

धातु + तनु अम्ल —> लवण + हाइड्रोजन गैस

उदाहरण :
(i) Fe + 2HCl —> FeCl2+ H2
(ii) Mg + 2HCl —> MgCl2+ H2
(iii)Zn + 2HCl —>  ZnCl2+ H2
(iv) 2Al + 6HCl —> 2AlCl3+ 3H2

(4) धातुओ के अन्य धातु लवणों के साथ अभिक्रिया
धातु  (क) + लवण विलयन ( ख )—>   लवण विलयन ( क)+ धातु ( ख)

• अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम क्रियाशील धातुओं को उनके योगिक के विलयन से विस्थापित करती है। एज धातुओं की सक्रियता श्रेणी पर आधारित है।

 

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सक्रियता श्रेणी

सक्रियता श्रेणी वह सूचि है जिसमे धातुओं को क्रियाशीलता के अवरोही क्रम मे व्यवस्था कि गई है

  • धातु एवं अधातुों के साथ अभिक्रिया
  •  तत्वों की अभिक्रियाशीलता संयोजकता कोश को पूर्ण करने की प्रवृति के रूप मे समझी जा सकती है।
  • धातु के परमाणु अपने संयोजकता कोश मे इलेक्ट्रान त्याग करते है और धनायन बनाते है। अधातु के परमाणु सयोजकता कोश मे इलेक्ट्रान ग्रहण कर त्रिनायन बनाते है।

आयनिक यौगिक

विपरीत आवेशित आयन एक दूसरे को आकर्षित करते है तथा मजबूत स्थिर वैधुत बल मे बंधकर आयनिक योगिक बनाते है।

आयनिक यौगिकों के गुण
1. भौतिक स्वभाव: ठोस और कठोर, आम तौर पर भंगुर होते हैं।
2.  गलनांक एवं कवतांनक: वे उच्च पिघलने और उबलते बिंदु है।
3. घुलनशीलता: पानी में आम तौर पर घुलनशील और मिट्टी के तेल जैसे विलायकों में अघुलनशील,
पेट्रोल आदि
4. व्रिदूत चालकता: आयनिक यौगिकों में पिघला हुआ बिजली होती है और
समाधान फार्म पर ठोस स्थिति में नहीं।

 

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धातु की घटनाएं
खनिज: पृथ्वी की पपड़ी में स्वाभाविक रूप से होने वाले तत्व या  यौगिको  को खनिज कहा जाता है

अयस्क:वे खनिज जिनमे धातु अधिक मात्रा मे पाई जाती है और उसे निकालना लाभकारी अयस्क कहते है

 

कुछ महत्वपूर्ण शर्तें
(i) गैंगू:  पृथ्वी से खनित अयस्कों मे मिट्टी, रेत आदि जैसी अशुद्धियों पाई जाती है , जिन्हे गैंग कहा जाता है

(ii)ब्रजन: सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्तिथि मई अधिक ताप पर गरम करने पर यह ऑक्साइड मे बदल जाता है। इस प्रक्रिया को ब्रजन कहते है .    उद्धरण

(iii)निस्तापन: कार्बोनेट अस्यक को सिमित वायु मई अधिक ताप पर गरम करने से यह ऑक्साइड मई बदल जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है।

(iv)उपचयन: धातु ऑक्साइड से कार्बन जैसे उपचायक का उपयोग कर धातु प्रपात की जा सकती है।

V . धातुओं का परिक्षीकरण
धातुओं से अपदृवये को हटाने के लिए सबसे अधिक उपयोगी विधि विधृत उपघटनी परिष्करण है।

 

ऐनोड इस —> आशूद ताम्बा
कैथोड़ पर —> अशुद्ध ताम्बा
विलयन —> CuSO4 + तनु सल्फुरिक अम्ल (सुष्कम मात्रा मे )

  • विधृत अपघटीए से जब विधृत धरा पवहित की जाती है तब एनोड से अशुद्ध धातु विधृत अपघटीए मई घुल जाती है।
  • उतनी ही मात्रा मई शुद्ध कॉपर विधृत अपघटीए से कैथोड़ पर निक्षेपित हो जाती है।
  • अविलय अशुद्धियों एनोड तली पर निक्षेपित होती है , जिसे एनोड पंक कहते है.

 

कार्बन एवं उसके यौगिक

 

V . संक्षारण
धातु अपने आसपास अम्ल , आद्रता अवं वायु आदि के सम्पर्क मे आने पर संक्षारित हो  जाते है।
1 . सिल्वर : वायु मे उपस्तिथ सल्फर के साथ अभिक्रिया कर सिल्वर – सल्फाइड बनता है जिसके कारण वास्तु काली हो जाती है।
2. कॉपर : कॉपर अद्रा कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके हरे रंग का कॉपर कार्बोनेट बनता है।
3. लोहा : अद्रा वायु मे लोहे पर भूरे रंग के पदार्थ की परत चढ़ जाती है।

संक्षारण से सुरक्षा
जंग लगने से बचाया जा सकता है
पेंट करके , तेल लगाकर , ग्रीस लगाकर, यशदलेपन करके , क्रोमियम लेपन दूवारा , एनोडिकरण या मिश्रधातु बनाकर।

यशदलेपन : लोहे अवं इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जस्ते ( zinc ) की पतली परत चढाई जाती है , इसे यशदलेपन प्रक्रम कहते है.
मिश्र धातु : मिश्र धातु दो या दो से अधिक और अधातु के समांगी मिश्रण होते है.

लोहा सुक्षम मात्रा मई कार्बन के मिश्रण के साथ लोहा कठोर और प्रबल हो जाता है।
इस्पात (steel ) = लोहा + निकैल और क्रोमियम
पीतल = कॉपर + जिंक
काँसा = कॉपर + टीन
सोल्डर = लैड + टीन
अमलगम = मर्करी (पारद) + अन्य तत्व

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