नोट्स : रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण

कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के लिए रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण पर  नोट्स और वीडियो व्याख्यान (पढ़ते चलो बढ़ते चलो – eckovation )।

आईआईटी दिल्ली से शिक्षकों के साथ अपने संदेहों पर चर्चा करने के लिए ग्रुप कोड 189643 से जुड़ें |

 

ऐसे परिवर्तन जिसमें नए गुणों वाले पदार्थो का निर्माण होता है , उसे रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं |

 

ऐसे पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में हिस्सा लेते हैं उन्हें अभिकारक कहते हैं | ऐसे पदार्थ जिनका निर्माण रासायनिक अभिक्रिया में होता है , उन्हें उत्पाद कहते हैं |

उदाहरण :

  1.  भोजन  पाचन
  2. लोहे  पर जंग लगना
  3. दही का बनना

 

रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार :

1. संयोजन अभिक्रिया : इस अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं |

उदाहरण :  1.  कोयले का दहन     2. जल का निर्माण

  • ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया :  जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ साथ ऊष्मा का बभी उत्सर्जन होता है
    उदाहरण : प्राकृतिक गैस का दहन2.  वियोजन अभिक्रिया: इस अभिक्रिया में एकल अभिकारक टूट क्र दो या या उससे अधिक उत्पाद बनाते हैं |

(i) उष्मीय वियोजन : ऊष्मा द्वारा किया गया वियोजन |

(ii) वैधुत वियोजन : वैधुत द्वारा प्रवाहित कर होने वाला वियोजन |

(iii) प्रकाशीय वियोजन : सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होने वाला वियोजन |
इस अभिक्रिया का उपयोग श्याम – शवेत फोटोग्राफी में होता है |

3.  विस्थापन अभिक्रिया: इन अभिक्रियाओं में अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके योगिक से विस्थापित कर देता है |

4.  द्विविस्थापन अभिक्रिया: इस अभिक्रिया में उत्पादों का निर्माण, दो यौगिकों के बीच आयनो के आदान प्रदान से होता है |

5.  उपचयन तथा अपचयन :
अपचयन: (i) जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का ह्वास होता है |

(ii) जब किसी पदार्थ में हाइड्रोजन की वृद्धि होती है |

दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं का प्रभाव :

(i) संक्षारण: जब कोई धातु, आद्रता, अम्ल आदि के संपर्क में आती है, जिससे धातु की ऊपरी पार्ट कमजोर हो | संक्षारित हो जाता है |

लोहे की वस्तुओं पर जंग लगना , ताम्बे के ऊपर हरी पर्त चढ़ना संक्षारण के उदाहरण है |

यशदलेपन, विधुत लेपन अऊर पेंट करके संक्षारण से धातुओं को बचाया जा सकता है |

(ii) विकृतगंधिता : वसायुक्त और तैलीय खाद्यसामग्री , वायु के संपर्क में आने पर उपचयित हो जाती है,जिससे उसके स्वाद और गंध में परिवर्तन हो जाता है , इसे विकृतगंधिता कहते हैं |

  • विकृतगंधिता रोकने के उपाय :
  1.  प्रति ऑक्सीकारक का उपयोग करके
  2. वायु के स्थान पर नाइट्रोजन गैस द्वारा
  3.  शीतलन द्वारा

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