विद्युत: बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स

आवेश – आवेश परमाणु का एक मूल्य कण होता हैं l यह धनात्मक भी हो सकता हैं और ऋणात्मक भी l

  • समान आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं l
  • असमान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं l
  • कूलॉम ( c ) आवेश का S.I मात्रक हैं l
    1  कूलॉम आवेश = 6 ×10 *18 एलेक्ट्रॉनों पर उपस्थित्त आवेश
    1 इलेक्ट्रान पर आवेश = 1.6 × 10-19 C ( ऋणात्मक आवेश )
    Q = ne
    Q = कुल आवेश
    n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
    e= एक इलेक्ट्रान पर आवेश

विद्युत धारा  आवेश के प्रवाहित होने की दर को विद्युत धारा कहते हैं l

विधुत धारा को ऐमीटर द्वारा मापा जाता हैं
प्रतीक :

 

ऐमीटर का प्रतिरोध काम कम होता हैं तथा हमेशा श्रेणी क्रम में जुड़ता हैं l
● विद्युत धारा की दिशा एलेक्ट्रॉन के प्रवाहित होने की दिशा के विपरीत मानी जाती हैl क्योंकि जिस समय विद्युत की परिघटना का सर्वप्रथम प्रेक्षण किया था इलेक्ट्रॉन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी अतः विद्युत धारा को धनावेशों का प्रवाह माना गया l
विभवांतर ( v ) एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने का कार्य l

 

1 वोल्ट: जब एक कूलॉम आवेश को लाने के लिए एक जूल का कार्य होता हैं तो विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता हैं l

                                        1V= 1JC¯¹ 

वोल्ट मीटर =  विभवांतर को मापने की युक्ति इसका प्रतिरोध ज़्यादा होता हैं और हमेशा पार्श्वक्रम में जुड़ता हैं l
वोल्ट मीटर का प्रतीक =   

सेल = यह एक सरल युक्ति हैं जो विभवांतर को बनाये रखती हैं l
● विद्युत धारा हमेशा उच्च विभवांतर से निम्न विभवांतर की तरफ प्रवाहित होतीं हैं l
● विद्युत परिपय में सामान्यतः प्रयोग होने वाले कुछ अवयवों के प्रतीक :

 

ओम का नियम : किसी विद्युत परिपथ में धातु के तार के दो सिरों के बीच विभवांतर उसमे प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के समानुपाती होता है परन्तु तार का तापमान समान रहना चाहिए l

       V = IR

R एक नियतांक है जिसे तार का प्रतिरोध कहते है l

प्रतिरोध : यह चालाक का वह गुण है जिसके कारण यह प्रवाहित होने वाली धारा विरोध करता है l

SI मात्रक – ओम ( Ω ) है l

जब परिपथ में से 1 एम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हों तथा विभवांतर एक वोल्ट का हो तो प्रतिरोध 1 ओम कहलाता है l

 धारा नियंत्रक : परिपथ में प्रतिरोध को परिवर्तित करने के लिए जिस युक्ति का उपयोग किया जाता हैं उसे धारा नियंत्रक कहते है l

 

कारक जिन पर एक चालाक का प्रतिरोध निर्भर करता है :
( i ) चालक की लम्बाई के समानुपाती होता है l
(ii) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है l
(iii) तापमान के समानुपाती होता हैं l
(iv) पदार्थ की प्रकृति पर भी निर्भर करता हैं l

 

विद्युत प्रतिरोधकता : 1 मीटर भुजा वाले घन के विपरीत फलकों में से धरा गुजरने पर जो प्रतिरोध उत्पन्न होता है वह प्रतिरोध कहलाता है l

SI मात्रक Ωm ( ओम मीटर ) :
⚈ प्रतिरोधकता चालाक की लम्बाई व अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के साथ नहीं बदलती परन्तु तापमान के साथ परिवर्तित होती है l
⚈ धातुओं व मिश्रधातुओं का प्रतिरोधकता परिसर –10¯10 -*6 Ωm
⚈ मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं से अपेक्षाकृत: अधिक होती है l
⚈ मिश्र धातुओं का उच्च तापमान पर शीघ्र ही उपचयन ( दहन ) नहीं होता अतः इनका उपयोग तापन युक्तियों में होता है l
⚈ तांबा व एल्युमीनियम का उपयोग विद्युत संचरण के लिए किया जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधकता काम होती है l

 

प्रतिरोधकों का श्रेणी क्रम संयोजन :

जब दो या तीन प्रतिरोधकों को एक सिरे से दूसरा सिरा मिलाकर जोड़ा जाता है तो संयोजन श्रेणीक्रम संयोजन कहलाता है l

श्रेणीक्रम में कुल प्रभावित :
                                                         Rs = R1 + R2 + R3
प्रत्येक प्रतिरोधक में से एक समान धारा प्रवाहित होती है l
तथा कुल विभवांतर = व्यष्टिगत प्रतिरोधकों के विभवांतर का योग l

अतः एकल तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से बड़ा है l

पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधक :

 

पार्श्वक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवांतर उपयोग किये गए विभवांतर के बराबर हैं l तथा कुल धारा प्रत्येक व्यष्टिगत प्रतिरोध में से गुजरने वाली धाराओं के योग के बराबर होती हैं l

एकल तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम प्रथक l
प्रतिरोधों के व्युत्क्रमोँ के योग के बराबर होता है l

 

श्रेणीक्रम संयोजन की तुलना में पार्श्वक्रम संयोजन के लाभ :

 

( 1 ) श्रेणी क्रम संयोजन में जब एक अवयव खराब हो जाता है तो परिपथ टूट जाता है तथा कोई भी अवयव काम नहीं करता l
( 2 ) अलग-अलग अवयवों में अलग-अलग धारा की ज़रूरत होती हैं, यह गुण श्रेणी क्रम में उपयुक्त नहीं होता क्योंकि श्रेणीक्रम में धारा एक जैसी हैं l
( 3 ) पार्श्वक्रम संयोजन में प्रतिरोध कम होता हैं l

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विद्युत धारा का तापीय प्रभाव: 

यदि एक विद्युत परिपथ विशुद्ध रूप से प्रतिरोधक है तो स्रोत की ऊर्जा पूर्ण रूप से ऊष्मा के रूप मैं क्षयित होती है, इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं l
ऊर्जा = शक्ति × समय

जूल का विद्युत धारा का तापन नियम :

इस नियम के अनुसार :

(i) किसी प्रतिरोध में तत्तपन्न उष्मा विद्युत धारा वर्ग के समानुपाती होती हैं l
(ii) प्रतिरोध के समानुपाती होती हैं l
(iii) विधुत धारा के प्रवाहित होने वाले समय के समानुपाती होती हैं l

⚈ तापन प्रभाव हीटर, प्रेस आदि में वाँछनीय होता हैं परन्तु कम्प्यूटर, मोबाइल आदि में अवाँछनी होता होता हैं l
⚈ विद्युत बल्ब में अधिकाशं शक्ति उष्मा के रूप प्रकट होती हैं तथा कुछ भाग प्रकाश के रूप में उत्सर्जित होता हैं l
⚈ विद्युत बल्ब का तंतु टंगस्टन का बना होता हैं क्योंकि :-

(i) यह उच्च तापमान पर उपचयित नहीं होता हैं l
(ii) इसका गलनांक उच्च ( 3380℃ ) है l
(iii) बल्बों में रासायनिक दृष्टि से अक्रिय नाइट्रोजन तथा आर्गन गैस भरी जाती हैं जिससे तंतु की आयु में वृद्धि हो जाती हैं l

 

विद्युत शक्ति : उर्जा के उपभुक्त होने की दर को शक्ति कहते हैं l
प्रतीक = 

                                            प्रश्नावली

 

      अतिलघु उत्तरीय प्रश्न ( Mark 1)

1. निम्न के SI मात्रक लिखो :
(a) विद्युत धारा
(b) विभवांतर
(c)प्रतिरोध
(d) उपभुक्त विद्युत ऊर्जा

2. प्रतिरोधकता को परिभाषित करें l

3. धारा को मापने वाला यंत्र हैं l

4. बल्व के फिलामेंट ( तंतु ) के तत्व का नाम बताओ l

5. प्रतिरोधों के संयोजन के प्रकार बताओ l

 

लघुउत्तरीय प्रश्न ( 2 Mark )

1. वाल्टमीटर व् एमीटर परिपथ में कैसे जोड़े जाते हैं ?

2. बल्व का तंतु उच्च गलनांक वाला क्यों होता हैं ?

3. फ्यूज की तार विद्युत उपकरणों को कैसे बचती हैं ?

4. 1 kwh में कितने जूल होते हैं ?

5. P, I तथा V में सम्बंध बताओ l

6. किसी चालक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक बताओ l

लघुत्तरीय प्रश्न ( 3 Marks )

1. ओम का नियम बताओ l V, I तथा R के बीच मे सम्बन्ध व्युत्पन्न करों l V तथा I के बीच में ग्राफ खीचों l

2. जूल का विद्युत धारा का तापमान नियम क्या हैं ? इसके लिए व्यंजक व्युत्पन्न करो l

3. यदि किसी चालाक की लम्बाई को दुगना तथा मोटाई को आधा कर दिया जाए तो नया प्रतिरोध होगा ?

4. A तथा B के बीच में प्रभावित प्रतिरोध निकालो :

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ( 5 Marks )

1. जूल के तापन नियम को वर्णन करों l किसी चालक में उत्पन्न उष्मा किन-किन कारकों पर निर्भर करती हैं ?

2. नीचे दिए गए परिपथ में बताओ l


(a) कुल प्रभावित प्रतिरोध
(b) 4 Ω, 2 Ω के सिरों पर विभवांतर

3. किसी परिपथ मैं तीन प्रतिरोधक 2Ω,3Ω और 5Ω जुड़े हुए हैं तो बताओ
(a) अधिकतम प्रभावित प्रतिरोध
(b) न्यूनतम प्रभावित प्रतिरोध

4. किसी चालाक का प्रतिरोध किन-किन कारको पर निर्भर करता हैं, गणितीय व्यंजक लिखो l प्रतिरोधकता का SI मात्रक बताओ l

 

दीर्घ उत्तरीय प्र्शनो के हल

1. जूल के तापन का नियम : किसी प्रतिरोध में उत्पन्न उष्मा विद्युत धारा के वर्ग के समानुपाती होती हैं l
करक:  (1) विद्युत धारा
(2) समय

2. कुल प्रभावित प्रतिरोध 4Ω + 2Ω = 6Ω

           R = 3Ω

        (b) V (across 4Ω) = IR
         = I × 4 = 4V

         V (across 2Ω) = IR
         1 × 2 = 2V

          R = 10Ω

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