बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स – कार्बन एवं उसके यौगिक

बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए पाठ को अच्छे से समझना बहुत ज़रूरी है | इस article में कार्बन एवं उसके यौगिक पाठ  से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण नोट्स डाले गए हैं | यह  नोट्स आपको बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने में जरूर साहयता करेंगे |

कार्बन एवं उसके यौगिक

कार्बन आधातु है इसका प्रतिक “c ” है।
सर्वतोमुलखि तत्व कार्बन भूपरटी मई खनिजों के रूप मई 0 .02 % तथवा वायुमंडल मई कार्बन डाइ-ऑक्साइड के रूप मई 0.03% उपस्तिथ है.
सभी सजीवों पौधे और जन्तुओ का शरीर कार्बन योगिको का बना हुआ है।

कार्बन और यह संयोजी आबंध

कार्बन और यह संयोजी आबंध
कार्बन की परमाणु संख्या = 6
एलेक्ट्रोड विन्यास C(6)

K     L

2      4

 

कार्बन उत्कृषट गैस विन्यास कैसे प्राप्त करता है ?

  • कार्बन चतुसंयोजी होता है। कार्बन न तोह चार इलेक्ट्रान खोकर (C4+ धनायन ) न ही चार इलेक्ट्रान प्राप्त कर (C4+ ऋणायन) आयनिक आबंध बनता। छार अतिरिक्त इलेक्ट्रानो को धरना करना कार्बन के लिए अत्यंत मुश्किल है। कार्बन दूवारा चार इलेक्ट्रान खोने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आव्यशकता होती है. इसीलिए कार्बन अन्य परमाणु अथवा अन्य तत्वों के परमाणुओ के एलेक्ट्रोनो के साथ साझेदारी कर आबंध बनता है।
  • एक ही प्रकार या विभिन प्रका के परमाणुओ के एलेक्ट्रोनो को साझेदारी से बने आबंध को सेह-संयोजी आबंध कहते है.
  • कार्बन के अतिरिक्त के परमाण्डू हाइड्रोजन , ऑक्सीजन नाइट्रोजन और क्लोरीन भी एलेक्ट्रोनो की साझेदारी से आबंध बनाते है।

 

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सहयोजी यौगिकों के भौतीक गुण

1 . सेह – संयोजी योगिकों के गलनांक अवं क्वथनांक काम होते है कियोकि इनके बीच अन्तराअणुक बल बहुत काम होता है।
2 . सेह – संयोजी योगिक विद्रूत के कुचालक होते है कियोकि एलेक्ट्रोनो के बीच और कोई आवेशित कण नहीं होते है

 

कार्बन की सर्व्रतोमुखी प्रकृति
( 1 ) श्रंख्लन – कार्बन कार्बन परमाणुओ के बीच सेह – संयोजी आबंध बनाकर लम्बी श्रंख्ला, शाखित , श्रंख्ला और वल्य संगरचना वाले भोगीको का निर्माण करता है। कार्बन के परमाणु एक दूसरे से एकल , द्रि या त्रि अाबंध दुवारा जुड़े हो सकते है।
(2 ) चतु : सयोजकता कार्बन परमाणु की सयोजकता 4 है। जिसके कारण कार्बन चार अन्य कार्बन परमाणु; एक संयोजी परमाणु(H , C l ) ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और सल्फर के साथ आबंध बना सकता है।

संतृप्त और असंतृप्त कार्बनिक योगिक
कार्बन और हाइड्रोजन के योगिकों को हाइड्रोजन कहते है।

 

 

 

इलेक्ट्रान बिंदु संरचना
संतृप्त हाइड्रोकार्बन – एथेन C2H6 :
संतृप्त हाइड्रोकार्बन के नाम आणिवक सूत्र तथा सरचनात्मक सूत्र

भौतिक विज्ञान – बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

 

इलेक्ट्रान बिंदु संरचना
संतृप्त हाइड्रोकार्बन

संरचना के आधार पर हाइड्रोकार्बन

बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न – रासायनिक विज्ञान

उपरोक्त तीन उद्धरण मई आणविक सूत्र सामान है लेकिन भीनन भिनन सरचनाओ वाले ऐसे योगिकों को संचनात्मक समावयव लेहतय है.

प्रकृतामक समूह

  • हाइड्रोजनकार्बन श्रंखला मई यह तत्व एक या अधिक हाइड्रोजन को इस प्रकार प्रतिस्थापित करते है की कार्बन की संजोयोगता संतुरिष्ट रहती है. ऐसे तत्वों को विषम परमाणु कहते है।
  • यह विषम परमाणु या विभिन परमाणुओ का समूह जो कार्बन योगिक को अभिक्रियाशील तथा विशिषट गुण प्रदान करते है , प्रक्रयात्मक समूह कहलाते है।

 

समाजितए श्रेणी
योगिकों की वह श्रंखला जिसने कार्बन श्रंखला मई सीतिथ हाइड्रोजन एक ही प्रकार के परकायार्त्मक समूह दुवारा प्रतिस्थापित होता है उद्धरण अल्कोहल CH3OH,  C2H5OH,  C3H7OH,  C4H9OH

सामान सामान्य सूत्र

  • समजातीय श्रेणी की उतरोतर सदसयो मे -CH२ का अंतर तथा 14u द्रव्यमान इकाई का अंतर होता है।
  • समान रासायनिक गुणधर्म तथा अणु द्रव्यमान बढ़ने से भोतिक गुण धर्मो मई भीनता आती है।

 

कार्बन यौगिकों को नाम प्रद्धति

  • योगिक मई कार्बन परमाणुओ ज्ञात करो
  • प्राक्यात्मक समूह को पूर्वलगन या अनुलगन के साथ दर्शाओ

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कार्बन योगिकों रासयनिक गुणधर्म

  • कार्बन तथा उसके योगिक ईंधन के रूप मे इस्तेमाल किये जाते है कियोकि दें पर प्रचुर मात्रा मई ऊष्मा और प्रकाश मुक्त करते है।
  • संतृप्त हाइड्रोकार्बन वायु की उपस्थिति मई जलने पर नीली स्वछ जवाला उत्पन करते है।
  • असंतृप्त हाइड्रोकार्बन दहन पर धुयें वाली पिली जवाला उत्पन करते है कियोकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन मई कार्बन की प्रतिशत मात्रा संतृप्त हाइड्रोकार्बन से अधिक होती है और वायु की उपस्तिथि मई कार्बन का पूर्ण उपचयन नहीं हो पाता।

  • पैलड़ीयम या निकले जैसे उत्प्रेरिको को उपस्तिथि मे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाते है।
  • वनस्पति तेलों से वनस्पति घी का निर्माण इस विधि दुवारा किया जाता है।

 

 

कुछ महतवपूरण कार्बन योगिक : एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल

एथेनॉल के भोतिक गुणधर्म

  • रहींहीन गंध और जलने वाला स्वाद
  • जल मे धुनलशीन
  • वृषपशील द्रव जिसका कवथनांक 351 K
  • उदासीन प्रकृति

 

एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल ) भोतिक गुणधर्म

  • रंगहीन द्रव , सावध मे खटा , सिरे जैसी गंध
  • कवथनांक 391 K
  • अशुद्ध एथेनोइक अम्ल शीलतन करने पर बर्फ की तरह जम जाता है इसलिए इसे गैलेशल एसिटिक अम्ल कहते है

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साबुन और अपमार्जक

  • साबुन लम्बी श्रृंखला वाले करबाकिसलिक अम्लों के सोडियम पोटासियम लवण होते है
    उधारण – C17H35COONa+
  • साबुन केवल मृदु जल मे सफाई किया करते है
  • अपमार्जक – लम्बी श्रंख्ला वाले करबाकिसलिक अम्लों या सुल्फोनाते लवण होते है
  • अपमार्जक कड़ोर एवं मृदु जल मई सफाई किया करते किया करते है

साबुन कठोर जल मे उपस्तिथ मगनसेसियम तथा कैल्शियम के लवण के साथ अभकरीया करके अग्लुङशील पदार्थ सकम बनता है। यह सकम सफाई प्रक्रिया मई बधा डालता है

अपमार्जक का उपयोग करके कठोर जल नल मई उपस्तिथि मैगनीशियम तथा कैल्शियम आयनो के साथ अघुलनशील स्कम नहीं बनता.

 

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